कुछ पल पीछे छोड़ आया मैं

(-स्पर्श सक्सेना)…

घंटों का हिसाब लगाते लगाते
कुछ पल पीछे छोड़ आया मैं
कुछ बूँद पानी के लिए
दरिया पीछे छोड़ आया मैं

अब पीछे मुड़कर देखा
तो पता चला मुझे
ज़िन्दगी बनाने को
ज़िन्दगी पीछे छोड़ आया मैं

चाहिए सबको साहिल
पर डूबना कौन जाने
चाहिए सबको साहिल
पर डूबना कौन जाने


पानी है सब को
मंज़िल पर चलना कौन जाने
जिंदा तो बहुत हैं यहाँ
पर जीना कौन जाने

पानी है सब को
मंजिल पर चलना कौन जाने
जिंदा तो बहुत हैं
यहां पर जीना कौन जाने