कॉकटेल 2: लॉयल्टी टेस्ट का नया स्वरूप

-आद्या श्रीवास्तव

कॉकटेल 2 सिंपल में लॉयल्टी टेस्ट का तड़का देने वाली रॉमकॉम मूवी है ,जो प्यार और दोस्ती दोनो को एक साथ लेकर चलती है। फ़िल्म कम्युनिकेशन की ज़रूरत में फोकस करती है।

निर्देशक होमी अदजानिया की इस फ़िल्म में दो प्यार करने वालो (दिया और कुणाल ) की लाइफ सिंपल सी चल रही थी फिर एक जोक आया उसने इनसिक्योरिटी को जन्म दिया। इनसिक्योरिटी को दूर करने के लिए दिया ने लॉयल्टी टेस्ट किया। अब देखना ये है की कुणाल उस लॉयल्टी टेस्ट में पास होता है या फेल।और इसमें एली क्या रोल निभाती है।

निर्माता दिनेश विजन की फ़िल्म भले ही रॉमकॉम थी मगर नाही शाहिद की रश्मिका के साथ केमिस्ट्री दिखी नाही कृति के साथ दिखी। मूवी में कोई कॉमेडी नहीं दिखी बल्कि जोक्स और अनकम्फर्टेबल सिचुएशन की वजह से अन्नोयिंग हो रहा था।

लेखक लव राजन और तरुण जैन की इस मूवी में अच्छी स्टोरीराइटिंग की कमी थी।मूवी उस गहराई तक पहुँच नहीं पाई कहानी और किरदार दिल को नहीं छू पाए ना ऐसे बन पाए जो लंबे समय तक याद रहे।

मूवी के कैरेक्टर्स को मैथ्स की प्रॉब्लम सोल्व करने जैसा है। उसके लिए गहराई से समझने की कोशिश करनी होगी। अगर उनकी बैकस्टोरी बतादी जाती तो लोग उनके किरदारो से ज़्यादा कनेक्ट कर पाते। दिया (रश्मिका मँदना) का किरदार ओवरिमेजिनेटिव और बिना सोचे समझे डिवीज़न लेने वाला था। वो पहले चीज़े कर देती थी उसके बाद सोचती थी। एक जोक की वजह से अपने 16 साल पुराने बॉयफ्रेंड पर शक करने लगी।
कुणाल( शाहिद कपूर) का किरदार बड़ा ही अजीब था। उससे जो कोई कुछ भी बोल देता था वो कर देता था और सबकी बाते सुन लेता था। जैसे रश्मिका बोलती मान लेता चाहे अकेले एली के घूमने जाना हो या एली को अपने घर रुकने देना हो । वो अपने आप को एक्सप्रेस करना नहीं चाहता था और सोचता था की सब उसकी मन की बात समझे।
ऐली( कृति सेनन)फ्री नेचर की थी पर उससे अकेलापन भी खाता था और प्यार चाहिए था। उसके किरदार की झलक उसके आउटफिट्स, सोच और रहने की तरह से मिलती है।
ये सारे किरदार इर्रिटेटिंग लगते है पर कभी कबाड़ हाइपर रीयलिस्टिक भी लगते है।
इस मूवी में दिया और एली के पर्सपेक्टिव दिखाए जाते है पर लास्ट में कुणाल पर्सपेक्टिव भी निखर के आता है।

सिनेमेटोग्राफर संथाना कृष्णन और रवि चंद्रन की कॉकटेल 2 की सिनेमेटोग्राफी बहुत अच्छी थी । सारी जगह एस्थेटिक और ड्रीमी लग रही थी। लोकेशंस जैसे सिसिली का चार्टर्स को एस्टाबलिश करने में इस्तेमाल अच्छा किया गया है। वाहन एली है केयरफ़्री नेचर दिखा और ऐसा लग रहा था की वो जगह एली के किरदार को रिप्रेजेंट कर रही है।

“ तुझको“ गाना दिखता है की कैसे दोनों की दुनिया एक दूसरे में ही थी या एक दूसरे के आसपास ही घूमती थी। “ माशूका” गाना अट्रैक्शन को एक्सप्रेस करता है। “ बंधु 2” वह जादू नहीं बिखेर पाया जैसे बंधु गाने में मीरा का केयर फ्री नेचर दिखा था ये बस एक रीमेक बनकर रह गया। ऐसा लग रहा था की ये लोग डांस नहीं बल्कि ट्रेंड फॉलो कर रहे हो।” जग से लाज“ में पूरी यह जवानी है दीवानी के बदतमीज़ दिल की वाइब आ रही थी। गाना अच्छा था पर उतना इंपैक्ट नहीं छोड़ा। “ जब तलक“ गाना पूरी रिफ्रेशिंग और पार्टी वाइब दे रहा था। गाना सुनते ही डांस करने का मन करता है।”वल्लाह “और “हमेशा” एक गाने थे।

कॉकटेल 2 मूवी कैसे प्यार हो गया पर फोकस नहीं करती बल्कि प्यार में बने रहना सिखाती है। हैप्पी एंडिंग की बाद की दुनिया दिखती है।