बंदर: डेटिंग ऐप ने पहुंचाया जेल

-आद्या श्रीवास्तव

 

बंदर फिल्म में एक बंदर, एक मदारी और बंदर का तमाशा देखने वाले दर्शक हैं। बंदर बदमाश है पर इतना क्या कि उसे पिंजड़े में बंद कर दिया जाए? मदारी के पास बंदर को कैद करने का रिज़न है पर क्या रिज़न सही है? दर्शक को बंदर या फिर मदारी से फर्क नहीं पड़ता, उसे बस तमाशे के मजे लेने हैं।

अनुराग कश्यप और साक्षी महता की इस निर्देशित मूवी में समर एक स्ट्रगलिंग आर्टिस्ट है। एक दिन उसके घर पुलिस आती है और उसे पकड़कर के ले जाती है। वो कहता रहता है की वो निर्दोष है पर क्या वो सचमे निर्दोष है? ये देखने के लिए मूवी देखनी होगी।

निर्माता निखिल द्विवेदी की पीक डिटेलिंग वाली दूसरी मूवी आ गई है। इसमे नाही हीरो है या हेरोइन, ना कोई प्रोतगनिस्त है ना ऐन्टैगोनिस्ट। यह। एक ऐसी मूवी है जो आज की रीऐलिटी, पिंजड़े का घईनॉन सच और बंदर की ज़िंदगी दिखाती हैऔर सोचने पर मजबूर कर देती है कि क्या हमेशा ।
फ़िल्म में वलगर भाषा बहुत इस्तेमाल हुई है, शायद इसलिए यह रीअलिस्टिक लगी। डायलॉग्स ऐसे हैं कि दिमाग में घर कर जाए। यहाँ हर कोई विक्टिम कार्ड खेलता है। विक्टिम कौन है, पता नहीं चल पा रहा है।
फिल्म मे पूरे समय अपने से जोड़े रखने की ताकत है। मूवी वह सच दिखती है जो ना देखा जा सकता है ना इग्नोर कीया जअ सकता है।
कई फिल्मों में जेल के सीन्स देखे कई कहानियाँ देखीं पर इस  फिल्म ने ल जेल की काली सच्चाई को दिखाया। इस जेल में सब होता है। छिपकली का नशा, नाच-गाना और मज़ा, वसूली की नमकीन और कोल्ड्रिंक की पार्टी और रूह कपा देने वाली बुलिंग।
मूवी मे सब कवर किया गया है , ऑनलिन डेटिंग, मराठी से त्रस्त लोग, एक्यूज्ड और गिल्टी में अंतर।

लेखक सुदीप शर्मा और अभिषेक बेनर्जी की इस मूवी मे एक से बढ़कर एक चरित्र है । यहाँ हर किरदार की परतों को दिखाया गया है, उनके अलग अलग ईमोशन दिखाए गए है और उसके साथ हिला देने वाली सच्चाई भी दिखाई गई है।एक तरफ समर मेहरा (बॉबी देओल) का सोफ़ेस्टिकटीकेशन दिखाया तो दूसरी तरफ गायत्री(सपना पब्बी) ,बेचारी अबला नारी देखेगी। आप सोच में पड़ जाओगे कि कौन सही है, कौन गलत।
सुहानी मेहरा (सान्या मल्होत्रा) ने एक ऐसी बहन का किरदार निभाया  है, जो अपने भाई की हरकतों से हैरान और परेशान है। निखिल( रिद्धि सेन) अपने क्लाइंट से परेशान पर पूरी जी-जान से केस लड़ने वाले लॉयर का किरदार निभाया है।खुशी(सब आजाद) गुस्सा करके सपोर्टिव हिलने वाली समर की गर्लफ्रेंड है। यहाँ आपको रिश्वतखोर पुलिस भी देखने को मिलेगी और आइसक्रीम खिलाने वाली पुलिस भी।

यह कहानी ऐसी दुनिया के बारे में है सब अपने आपको विक्टिम समझते हैं और दूसरे को दोषी। और जगह कास्ट और जेन्डर डिस्क्रिमनैशन होता होगा, यहाँ क्राइम डिस्क्रिमनैशन। एक कैदी दूसरे कैदी को उसके इल्ज़ाम की वजह से बुली करता है और उसके साथ क्या क्या करता है देखकर रोंटे खड़े होजनेगे और उलटी आने के पूरे चनसेस है।
मूवी देखकर एक बात समझ आ गई कि बंदर को पिंजरा तब तक लगता है जब तक वह पिंजरे में रहना सीख नहीं लेता। जब अपनी वो अपनी रिएलिटी एक्सेप्ट कर लेता है तब वो सिर्फ बंदर ही नहीं रहता बल्कि मदारी बन जाता है।