मैली है हवा पर…

(जाह्नवी श्रीवास्तव)…

वो घर जो रौनक का प्रतीक था, आज जेल सा लगता है। सबके मायूस से चेहरे देख कर अब डर सा लगता है। सारे देश में दहशत है भय है। एक वायरस ने सारे देश की हवा बदल दी है। सबको कैद रहने पर मजबूर कर दिया है, वो कदम जो आगे बढ़ने चले थे, उन्हें पीछे आने पर विवश कर दिया है।

मन में ये उम्मीद है कि दोबारा मिलेंगे पर हर रोज टीवी पर बेहिसाब बढ़ते उन आंकड़ों को देख वो उम्मीद की किरण भी दब सी गई है। वो सब जो कल तक फिल्मों में देखा था आज हकीकत बन चुका है।

ऐसे में मुझे उस गीत की एक पंक्ति याद आती है, “हम होंगे कामयाब एक दिन, मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास। हम होंगे कामयाब एक दिन।”

इसी विश्वास के साथ भारत बोल रहा है कि हम लड़ेंगे। हम अपनी आजादी के लिए एक और लड़ाई लड़ेगे, हम ढोल भी बजाएंगे, हम दीप भी जलाएंगे, जितना भी जरूरी हो हम घर के बाहर नहीं आएंगे।

हम सेनिटाइजर भी लगाएंगे और हम मास्क भी पहनेंगे। इस मैली हुई हवा को एक बार फिर से शुद्ध बनाएंगे। मन में धैर्य और संयम बनाए रखेंगे और हमारे लिए दिन रात लड़ रहे, उन सभी लोगों पर अपना भरोसा बरकरार रखेंगे। भारत बोल रहा है। हम जीतेंगे एक दिन जरूर जीतेंगे।