ठहरे से पानी में अक्स: गुलाबो-सिताबो

प्रो. अमिताभ श्रीवास्तव

अमिताभ-आयुष्मान की ‘गुलाबो-सिताबो’ कहानी है-एक जर्जर हवेली की, जो आंख बंद कर दौड़ती दुनिया में आपको एकदम से रोक देती है। हवेली की हर ईंट खिसक रहीं है, अंधेरा पसरा हुआ है, सीलन घुटन बन चुकी है। एक रोज, वो हवेली, जो कभी घर थी अचानक अदालती जुबान में ‘प्रापर्टी’ बन जाती है। रिश्ते दरकने लगते हैं। मंजिलें बंटने लगती है। मकानमालिक-किराएदार जबानी जूतमपैजार करते हैं तो पति-पत्नी तक ‘हक’ की लड़ाई में शातिर शतरंज खेलते है। वकील से लेकर पुरातत्व अधिकारी तक दम तोड़ती हवेली को देख चील गिद्धों की तरह दौड़ पड़ते हैं, बिल्डर्स शिकार पर ‘लायन्स शेयर’ चाहते हैं। पर फिर… ं

अमेजन प्राइम पर रिलीज यह फिल्म अमिताभ के अभिनय के इतिहास में एक नया पन्ना जोड़ती है। कब्र तक पहुंचने की मुनादी करती लंबी सफेद दाढ़ी, सिर पर चार-खाना कपड़ा, घायल चश्मा, आखिरी करवट ले रही कमर, उचका पायजामा और कभी ईरान तो कभी तूरान जाती चाल। मेकअप ‘पा’ के किरदार की अगली कड़ी है और हवेली को हसीना मानने वाले मिर्जा चुन्नन नवाब के किरदार में जान डालता है। ग्रे शेड का किरदार करने का ऐसा साहस इस मुकाम भी पर आसान नहीं होता। किरायेदार बांके के किरदार में आयुष्मान के सामने अभिनय का पहाड़ था। उन्होंने यकीनन कोशिश की पर उनके अभिनय से ‘वाउ’ फैैक्टर मिसिंग रहा। वकील के किरदार में पानसिंह तोमर के पत्रकार विजेन्द्र काला और पुरातत्व अधिकारी के किरदार में मानसून वेडिंग वाले विजयराज सेट लगे हैं।

दमदार महिला पात्र सुजीत सरकार की फिल्मों की खासियत होते हैं। आदर्श की बजाय असल। हाशिये पर कतई नहीं। वो शातिर से लेकर घटिया तक कुछ भी हो सकते हैं। पीपली लाइव फेम फरुख जफर बूढ़ी बेगम फातिमा के किरदार में हैं, जिन्होंने अमिताभ बच्चन के काउंटर पार्ट के रोल को जबरदस्त जिया है। आयुष्मान की प्रेमिका गुड्डो के किरदार में सृष्टि श्रीवास्तव और जुगाड़ू फौजिया के किरदार में पूर्णिमा शर्मा ने निम्न मध्यम वर्ग की उचक रही महत्वाकांक्षाओं को जिया है।

सुजीत सरकार पर्दे पर फिल्म नहीं बनाते, सिने साहित्य लिखते हैं-कुछ निर्मल वर्मा सा, मंथर गति से बहता हुआ, इतना कि जिंदगी का बहता पानी रुका सा दिखने लगे। जानी मानी स्क्रिप्ट राइटर जूही चतुर्वेदी ने जमकर उनका साथ दिया है क्योंकि पर्दे से पहले पर्चे पर कहानी करवट लेती है। दौड़ती दुनिया को मंथर गति आतंकित करती है पर शायद रुके हुए पानी में ही इन्सान और समाज को अपना अक्स दिखाई दे सकता है।